MDR में ‘डिस्काउंट’ कहां? CAIT ने मनाया ‘No UPI Day’, 60 सेकंड का किया सांकेतिक Blackout

भोपाल में व्यापारियों ने QR कोड पर किया सांकेतिक Blackout; CAIT बोला- UPI के खिलाफ नहीं, व्यापारियों पर MDR की अतिरिक्त लागत का विरोध

‘UPI रहे, Digital India आगे बढ़े, लेकिन MDR का बोझ नहीं’

भोपाल, 23 सितंबर। UPI पर प्रस्तावित Merchant Discount Rate (MDR) के विरोध में कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) भोपाल ने बुधवार को ‘No UPI Day’ के रूप में सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठानों पर लगे UPI QR कोड का सांकेतिक Blackout किया। CAIT ने स्पष्ट किया कि यह प्रदर्शन UPI के विरोध में नहीं, बल्कि UPI पर लगने वाली अतिरिक्त लागत यानी MDR के विरोध में है।

CAIT भोपाल के जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र शर्मा ने कहा कि व्यापारी UPI को डिजिटल अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण उपलब्धि मानते हैं और स्वयं भी इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते हैं। उनका कहना है कि विरोध का मुद्दा डिजिटल भुगतान नहीं, बल्कि उस पर प्रस्तावित शुल्क है।

‘MDR में Discount कहां है?’

धर्मेंद्र शर्मा ने MDR के नाम को लेकर व्यंग्य करते हुए कहा कि Merchant Discount Rate में व्यापारी को ‘Discount’ आखिर दिखाई कहां दे रहा है? उन्होंने कहा कि व्यापारियों के बीच इसी बात को लेकर सवाल उठ रहा है कि यदि व्यापारी से शुल्क लिया जाना है तो इसे ‘MTR—Merchant Tax Rate’ क्यों न कहा जाए।

हालांकि, CAIT के अनुसार आधिकारिक तौर पर MDR को टैक्स नहीं माना गया है। संगठन ने कहा कि यह भुगतान इकोसिस्टम में शामिल प्रतिभागियों के बीच वितरित होने वाला शुल्क है।

2 हजार से ज्यादा के UPI भुगतान पर MDR का मुद्दा

CAIT ने प्रेस नोट में दावा किया कि 15 अक्टूबर 2026 से निर्धारित पात्र 2,000 रुपए से अधिक के P2M UPI transactions पर 0.4% MDR लागू होने का प्रावधान है। संगठन के अनुसार, 75,000 रुपए और उससे अधिक के लेन-देन पर अधिकतम MDR ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन निर्धारित है।

CAIT का कहना है कि व्यापारियों के लिए यह अतिरिक्त लागत का विषय है। खासकर ऐसे कारोबारों में जहां डिजिटल भुगतान की संख्या अधिक होती है, प्रत्येक लेन-देन पर शुल्क लगने से कुल लागत बढ़ सकती है।

‘UPI बंद करने के पक्ष में नहीं हैं व्यापारी’

धर्मेंद्र शर्मा ने कहा कि UPI भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण उपलब्धि है और व्यापारी स्वयं इसके प्रमुख उपयोगकर्ताओं में शामिल हैं। इसलिए CAIT UPI को बंद करने के पक्ष में नहीं है।

उन्होंने कहा, “हम UPI के विरोध में नहीं हैं, हमारा विरोध UPI पर लगने वाली अतिरिक्त लागत यानी MDR को लेकर है।”

CAIT की मांग है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को आगे बढ़ाते हुए व्यापारियों पर अतिरिक्त MDR का बोझ नहीं डाला जाना चाहिए।

60 सेकंड का सांकेतिक Blackout

CAIT के अनुसार, बुधवार को किया गया Blackout केवल 60 सेकंड का सांकेतिक विरोध था। इसका उद्देश्य डिजिटल भुगतान व्यवस्था को रोकना नहीं, बल्कि MDR को लेकर व्यापारियों की चिंता सरकार और संबंधित संस्थाओं तक पहुंचाना था।

धर्मेंद्र शर्मा ने चेतावनी दी कि यदि व्यापारियों की इस चिंता पर सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो विरोध का दायरा आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर यह विरोध 60 घंटे और उसके बाद 60 दिनों तक बढ़ सकता है।

‘डिजिटल भुगतान मजबूत हो, लेकिन व्यवस्था न्यायसंगत हो’

CAIT ने कहा कि उसका उद्देश्य डिजिटल भुगतान व्यवस्था को कमजोर करना नहीं है। संगठन चाहता है कि UPI जैसी डिजिटल भुगतान प्रणाली का विस्तार जारी रहे, लेकिन व्यापारियों के लिए भुगतान व्यवस्था आर्थिक रूप से भी टिकाऊ और न्यायसंगत हो।

संगठन के अनुसार, व्यापारियों ने डिजिटल भुगतान को अपनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में MDR से जुड़ी लागत और उसके प्रभाव पर व्यावहारिक तरीके से विचार किया जाना चाहिए।

व्यापारी प्रतिनिधि भी रहे मौजूद

No UPI Day के दौरान CAIT भोपाल के पदाधिकारी और व्यापारी प्रतिनिधि मौजूद रहे। इस अवसर पर संदीप गोधा, कपिल करोटिया और सतेंद्र धियानी सहित अन्य पदाधिकारियों ने सांकेतिक प्रदर्शन में भाग लिया।

CAIT ने कहा कि आगे की रणनीति व्यापारियों की प्रतिक्रिया और MDR से जुड़े निर्णय के आधार पर तय की जाएगी।

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