IAF नहीं, अब IASF कहिए… जानिए नाम बदलने की क्या हो रही तैयारी?

नईदिल्ली

भारत ने अंतरिक्ष में महाशक्ति बनने की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। भारतीय वायुसेना (IAF) का नाम जल्द ही भारतीय वायु और अंतरिक्ष सेना (IASF) हो जाएगा। यह उन बदलावों का प्रतीक है जो भारत को एक बेहतरीन 'एयर पावर' से 'मजबूत एयरोस्पेस पावर' बनाएंगे। IAF ने सरकार को पूरा प्‍लान बनाकर भेज दिया है। एक सूत्र ने हमारे सहयोगी 'द टाइम्‍स ऑफ इंडिया' से कहा, 'हमें जल्‍द प्रस्ताव के मंजूर होने की उम्मीद है।' IAF ने अंतरिक्ष के हर पहलू का दोहन करने के लिए तैयारी शुरू कर दी है। अब यह सिर्फ ISR (इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रीकॉनेसॉ), कम्युनिकेशन और नेविगेशन क्षमताओं तक सीमित नहीं है। वायुसेना अब ISRO, DRDO, IN-SPACe और प्राइवेट इंडस्ट्री के साथ मिलकर काम कर रही है। सूत्र ने कहा, 'PNT(पोजीशनिंग, नेविगेशन और टाइमिंग), अडवांस्‍ड ISR और कम्युनिकेशन, अंतरिक्ष मौसम भविष्यवाणी, स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस, स्‍पेस ट्रैफिक मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में काम चल रहा है।'

वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी भी अंतरिक्ष के क्षेत्र में रक्षात्मक और आक्रामक क्षमताओं को बढ़ाने की बात पर जोर दे चुके हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सूत्र का कहना है 'अंतरिक्ष के पास, 20 से 100 किमी की ऊंचाई और बाहरी अंतरिक्ष भविष्य की जंगों का मैदान होगा। हवा और अंतरिक्ष के बीच काम करने के लिए निर्माण किए जा रहे हैं। भारत को भी इसके लिए तैयार रना होगा।'

चीन भी बढ़ा रहा है क्षमताएं
अब अगर चीन के पास अंतरिक्ष के लिए पीपुल्स लिबरेशन आर्मी स्ट्रैटेजिक सपोर्ट फोर्स है और अमेरिका ने भी USSF तैयार कर ली है। वहीं, ब्रिटेन, जापान, फ्रांस और रूस जैसे कई देशों के पास भी अपनी वायुसेना में स्पेस कमांड्स हैं। ऐसे में भारतीय वायुसेना के पास भी भविष्य में विस्तार से अलावा कोई विकल्प नहीं रह जाएगा।

2030 तक स्पेस में होंगे 100 से ज्यादा मिलिट्री सैटलाइट्स!

 

  • IAF का प्‍लान है कि अगले सात से आठ सालों में प्राइवेट सेक्टर की मदद से 100 से ज्यादा छोटे-बड़े मिलिट्री सैटलाइट्स अंतरिक्ष में पहुंचा दिए जाएं।
  • 2019 में बनी ट्राई-सर्विस डिफेंस स्पेस एजेंसी भी फुल-फ्जेल्‍ड स्पेस कमांड के रूप में बदल रही है।
  • ऑफिसर्स और एयरमेन की ट्रेनिंग में अब अंतरिक्ष सेक्टर को भी शामिल किया गया है।
  • सूत्र ने कहा, 'अंतरिक्ष के करीब, 20 से 100 किलोमीटर की ऊंचाई पर, और आउटर स्पेस में भविष्य के युद्ध होंगे। एयर और स्‍पेस के बीच में सीमलेस तरीके से ऑपरेट करने के लिए अडवांस्‍ड विंग्ड बॉडीज बनाई जा रही हैं।'​

चीन, अमेरिका, जापान… अब अंतरिक्ष बनेगा जंग का मैदान

 

  • वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने बार-बार भारत के लिए अंतरिक्ष में आक्रामक और रक्षात्मक क्षमताएं विकसित करने पर जोर दिया है। मार्च 2019 में 'मिशन शक्ति' की सफलता के बाद जोश बढ़ा है। तब DRDO ने एक ऐंटी-सैटलाइट (ASAT) इंटरसेप्‍टर मिसाइल की मदद से धरती की निचली कक्षा में 283 किलोमीटर ऊंचाई पर 740 किलोग्राम वजनी माइक्रोसैट-R सैटलाइट को नष्ट किया था।
  • चीन बड़ी तेजी से ASAT हथियार बना रहा है। इनमें डायरेक्‍ट असेंट मिसाइलों से लेकर को-ऑर्बिटल किलर्स के साथ-साथ लेजर, इलेक्‍ट्रोमैग्‍नेटिक पल्‍स वेपंस, जैमर्स और साइबर वेपंस शामिल हैं।
  • अगर चीन के पास स्पेस सेक्टर के लिए पीपुल्स लिबरेशन आर्मी स्ट्रैटेजिक सपोर्ट फोर्स (PLASF) है तो अमेरिका ने 2019 में एक पूर्ण अंतरिक्ष बल (USSF) बनाया है। यूके, जापान, फ्रांस और रूस जैसे कई अन्य देशों की वायुसेना में भी अंतरिक्ष कमान या विंग है।​

 

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