एशियाई तेल बाजारों में बड़ा खेल करने की योजना बना रहा सऊदी अरब, बड़ा खुलासा!

 नईदिल्ली

ओपेक प्लस का अहम सदस्य और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश सऊदी अरब को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. एक तरफ जहां दुनिया के अधिकांश विकसित और विकासशील देश डीकार्बोनाइजेशन की अपनी योजनाएं तेज कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ सऊदी अपने गैस और तेल के एजेंडे को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग पैंतरेबाजी रहा है. सऊदी अधिकारियों के स्टिंग ऑपरेशन का एक ऑडियो सामने आया है जिससे पता चला है कि सऊदी अरब ने एशिया और अफ्रीका के बाजारों में तेल की मांग को कृत्रिम तरीके से बढ़ाने की योजना बनाई है.

सेंटर फॉर क्लाइमेट रिपोर्टिंग और चैनल 4 न्यूज ने ब्रिटेन में एक स्टिंग ऑपरेशन किया है जिसमें सऊदी अरब के ऑयल सस्टेनेबिलिटी प्रोग्राम (OSP) के अधिकारियों ने स्वीकार किया कि सऊदी अरब की सरकार पेट्रोल, तेल और डीजल उत्पादों के लिए अफ्रीका और एशिया में मांग कृत्रिम तरीके से बढ़ाने की योजना बना रही है. 

स्टिंग ऑपरेशन की एक ऑडियो रिकॉर्डिंग सामने आई है जिसमें एक अंडरकवर रिपोर्टर सऊदी अधिकारी से पूछता है, 'मेरा मानना है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से तेल की डिमांड कम होने का जोखिम है और इसलिए OSP को कुछ प्रमुख बाजारों में तेल की मांग को कृत्रिम तरीके से बढ़ाने के लिए स्थापित किया गया है?'

जवाब में सऊदी अधिकारी ने कहा, 'हां. यह उन कुछेक पहलुओं में से एक है जिसे हम करने की कोशिश कर रहे हैं. यह हमारे मुख्य उद्देश्यों में से एक है.'

योजना को सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का समर्थन हासिल

अधिकारी ने कहा कि कृत्रिम तरीके से तेल की मांग बढ़ाने की इस योजना को सऊदी अरब के वास्तविक शासक क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का समर्थन हासिल है.

इस योजना के तहत अफ्रीका के तट पर बिजली स्टेशन जहाजों का एक बेड़ा बनाना शामिल है, जो बिजली पैदा करने के लिए भारी ईंधन का उपयोग करेगा. योजना का लक्ष्य 'सुपरसोनिक' वाणिज्यिक विमानन शुरू करने के लिए तकनीक को विकसित करना भी है. इन सुपरसोनिक विमानों में पारंपरिक हवाई यात्रा की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक केरोसिन की जरूरत होगी.

तेल की मांग बढ़ाने के लिए सऊदी अरब एशियाई और अफ्रीकी बाजारों में तेल आधारित वाहनों की संख्या बढ़ाने की भी योजना बना रहा है. इस बीच, अधिकारियों ने कहा कि सऊदी अरब वैश्विक स्तर पर इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए दी जाने वाली इंसेंटिव और सब्सिडी का मुकाबला करने की भी योजना बना रहा है ताकि जीवाश्म ईंधन पर अंतरराष्ट्रीय निर्भरता को बनाए रखा जा सके, खासकर अफ्रीका जैसे उभरते बाजारों में.

सऊदी की तेल उत्पादन बढ़ाने की योजना

सऊदी अरब वैश्विक मांग को देखते हुए लंबे वक्त तक कच्चे तेल का अधिक से अधिक उत्पादन जारी रखेगा. मई में ही सऊदी की तरफ से घोषणा की गई थी कि वो 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत तक अपने कच्चे तेल के उत्पादन को 10 लाख बैरल प्रतिदिन से बढ़ाकर 1.3 करोड़ बैरल प्रतिदिन कर देगा. सऊदी अरब के प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान ने कहा है कि अगर मांग बनी रहती है तो सऊदी अरब उत्पादन के इस स्तर को बनाए रखेगा.

सऊदी अरब पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (OPEC) में दूसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है. कच्चे तेल के उत्पादन और उसकी कीमत निर्धारण में सऊदी की अहम भूमिका रही है.

इस साल सितंबर में, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने पूर्वानुमान लगाया था कि जीवाश्म ईंधन की मांग घट जाएगी. एजेंसी ने कहा था कि मांग दशक के अंत से पहले अपने चरम तक पहुंच जाएगी और उसके बाद ये धीरे-धीरे गिरती जाएगी. पूर्वानुमान को लेकर ओपेक का कहना था कि यह वैचारिक रूप से प्रेरित बेहद जोखिम भरा अव्यावहारिक पूर्वानुमान है. ओपेक का कहना था कि तेल और गैस की मांग लंबे समय तक कमजोर नहीं होने वाली है.

मांग बढ़ाने के प्लान को लेकर सऊदी की आलोचना

सऊदी अरब की तरफ से तेल की मांग को कृत्रिम रूप से बढ़ाने की यह खबर  COP 28 जलवायु शिखर सम्मेलन से ठीक पहले आई है. संयुक्त अरब अमीरात के शहर दुबई में हो रहे इस शिखर सम्मेलन में दुनियाभर के तमाम बड़े नेताओं ने हिस्सा लिया है. इस सम्मेलन में ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने और जलवायु परिवर्तन से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए हरित ऊर्जा के इस्तेमाल की आवश्यकता पर बल दिया गया.

खबर के सामने आने के बाद सऊदी अरब की आलोचना हो रही है. कहा जा रहा है कि COP28 में हरित ऊर्जा की बात की जा रही है जो संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब जैसे मध्य-पूर्व के तेल उत्पादक देशों के उद्देश्यों के साथ मेल नहीं खाते हैं.

 

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