डिलिमिटेशन बिल पर शरद पवार का बड़ा दांव, NCP (SP) ने समर्थन का किया ऐलान

 मुंबई

महाराष्ट्र के दिग्गज नेता और एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार ने विपक्षी दलों का गच्चा देते हुए संसद में डिलिमिटेशन बिल का सपोर्ट करने का महत्वपूर्ण फैसला लिया है. सूत्रों के अनुसार, NCP (SP) संसद डिलिमिटेशन बिल का समर्थन करेगी. ये फैसला राजनीतिक गलियारों में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि NCP (SP) विपक्षी खेमे की प्रमुख पार्टियों में शामिल है। डिलिमिटेशन बिल देश में लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमा निर्धारण (Delimitation) की प्रक्रिया से संबंधित है जो जनगणना के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों को नए सिरे से निर्धारित किया जाएगा। 

NCP (SP) के इस फैसले से महाराष्ट्र की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है. पार्टी के इस कदम को कुछ लोग रणनीतिक माना जा रहा है, जबकि कुछ इसे केंद्र सरकार के साथ सकारात्मक रुख के तौर पर देख रहे हैं. अभी तक NCP (SP) की ओर से इस मुद्दे पर आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन सूत्र इस खबर को पुष्ट करते हुए बता रहे हैं कि पार्टी परिसीमन बिल के पक्ष में वोट करने या समर्थन जताने की तैयारी में है। 

परिसीमन बिल देश में लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमा निर्धारण (Delimitation) की प्रक्रिया से संबंधित है जो जनगणना के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों को नए सिरे से निर्धारित किया जाएगा. इस बिल के पास होने से संविधान के कुछ अनुच्छेदों में बदलाव किया जाएगा, ताकि सीटों का बंटवारा मौजूदा जनसंख्या के हिसाब से हो सके. अप्रैल में पेश किए विधेयक के अनुसार, लोकसभा के सदस्यों की अधिकतम संख्या बढ़ाकर 815 हो सकती है. इसके अलावा केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 तक सीटें हो सकती हैं. जिसके लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़कर कुल 850 हो सकती है। 

अभी सीटों की संख्या 1971 की जनगणना के आधार पर तय है, जबकि देश की आबादी और हालात काफी बदल चुके हैं. सरकार का कहना है कि लंबे समय से सीटों का नया बंटवारा रुका हुआ था. इस विधेयक से वह रोक हटेगी और एक परिसीमन आयोग बनेगा, जो नए चुनावी क्षेत्र तय कर सकेगा. इस विधेयक के तहत नवीनतम जनगणना के आंकड़ों के आधार पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिलने वाली सीटों की संख्या बदली जाएगी. साथ ही संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं नए सिरे से तय की जाएंगी, ताकि हर क्षेत्र में जनसंख्या के अनुसार संतुलन बनाया जा सके। 

अप्रैल में गिरा था बिल
आपको बता दें कि इस साल अप्रैल में संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़ा संवैधानिक संशोधन बिल पेश किया था, तब विपक्ष ने एकजुटता दिखाते हुए बिल का जोरदार विरोध किया और संसद में बिल के खिलाफ वोट कर विधेयक को गिरा दिया था. बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े थे, जबकि विरोध में 230 वोट पड़े थे. बिल को पेश करने के दौरान सदन में कुल 528 सांसद मौजूद थे. पारित होने के लिए 352 वोट चाहिए थे. तब सरकार 54 वोट से चूक गई थी. तब बिल के गिरने के बाद PM मोदी ने कहा था कि हमारे पास नंबर नहीं थे, इसका मतलब ये नहीं कि हम हार गए. आगे और मौके आएंगे। 

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