सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी: आपसी सहमति से बने शारीरिक संबंध खराब चरित्र का प्रमाण नहीं

हैदराबाद

सुप्रीम कोर्ट ने अपनी एक टिप्पणी में कहा है कि आपसी सहमति से दो अविवाहित व्यस्कों के बीच बने शारीरिक संबंध किसी व्यक्ति के खराब चरित्र का प्रमाण नहीं हो सकता है. न्यायाधीश मनमोहन और मनोज मिश्रा की पीठ ने यह टिप्पणी तेलंगाना राज्य स्तरीय पुलिस भर्ती बोर्ड को एक ऐसे उम्मीदवार की नियुक्ति का निर्देश देते हुए की, जिसका पुलिस कांस्टेबल के रूप में चयन एक आपराधिक मामले की वजह से रद्द कर दिया गया था। 

इस उम्मीदवार पर शादी का झांसा देकर रेप का आरोप लगा था, जो बाद में अदालत के बाहर सुलझ गया था. लेकिन तेलंगाना राज्य स्तरीय पुलिस भर्ती बोर्ड ने उस आरोप को देखते हुए खराब चरित्र का आधार देकर उम्मीदवार की भर्ती को रोक दिया था. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा, "सहमति से बने दो अविवाहित वयस्कों के बीच शारीरिक संबंध अपने आप में किसी व्यक्ति के चरित्र के खराब होने का आधार नहीं हो सकता है और न ही ऐसा होना चाहिए. ऐसा कोई कानून नहीं है जो सहमति से बने दो अविवाहित वयस्कों को अपनी पसंद का संबंध रखने से रोकता हो। 

उम्मीदवार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी
इस मामले में उम्मीदवार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी. सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीदवार की ओर से दायर अपील को स्वीकार कर लिया और तेलंगाना उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश के उस आदेश को बरकरार रखा जिसमें बोर्ड को पुलिस कांस्टेबल के पद पर उसकी नियुक्ति पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया गया था. तेलंगाना राज्य स्तरीय पुलिस भर्ती बोर्ड ने उनकी नियुक्ति इस आधार पर रद्द कर दी थी कि उनके खिलाफ 2014 में दर्ज विवाह का वादा करके बलात्कार का मामला दर्ज कराया गया था। 

हर संबंध शादी में तबदील नहीं होता है
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस उम्मीदवार का अपनी पड़ोसी के महिला के साथ संबंध था. आरोप लगने के बाद दोनों पक्षों के बीच समझौता भी हो गया था. साल 2015 में लोक अदालत में इसका निपटारा भी हो गया था. आईपीसी की धारा 376 के तहत कोई आरोप नहीं लगाया गया था. ऐसे में उस आधार पर उम्मीदवार को भर्ती न करने का फैसला सही नहीं है। 

कोर्ट ने कहा "हर रिश्ता शादी में तब्दील नहीं होता है. इसलिए, केवल इसलिए कि रिश्ता शादी में तब्दील नहीं हुआ, यह मानने का कोई आधार नहीं है कि एक पक्ष ने दूसरे को धोखा दिया है. इस आधार पर यह भी नहीं कहा जा सकता है कि उस व्यक्ति का चरित्र खराब था। 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button