2030 तक बदलेगी श्री धूनीवाले दादाजी मंदिर की तस्वीर, समाधि शताब्दी वर्ष से पहले मिलेगा भव्य और दिव्य स्वरूप

खंडवा
खंडवा में धूनीवाले दादाजी का धाम अब नया आकार लेने जा रहा है। करीब 50 साल पहले सीमेंट-कांक्रीट से बना यह मंदिर अब 100 करोड़ रुपए की लागत से सफेद संगमरमर से तैयार हो रहा है। मंदिर 108 स्तंभों पर खड़ा होगा। तीन प्रवेश द्वार होंगे।
सबसे खास बात यह है कि मंदिर में पिलर की संख्या भले ही 108 है, लेकिन नजर सिर्फ 84 ही आएंगे। नए मंदिर में बड़े दादाजी की समाधि बीचोंबीच रहेगी जबकि नर्मदा मंदिर बाजू में होगा। 30 जून को मंदिर का भूमिपूजन हाे चुका है। इसे सिंहस्थ 2028 से पहले बनाने की तैयारी है। अक्षरधाम मंदिर को डिजाइन करने वाले आर्किटेक्ट वीरेंद्र त्रिवेदी ही नए मंदिर को आकार दे रहे हैं।
सफेद मार्बल से बदलेगा दादा दरबार का स्वरूप
दादाजी धूनीवाले मंदिर के नए मॉडल में पूरा निर्माण सफेद मार्बल से किया जाएगा। वर्तमान मंदिर सीमेंट-कांक्रीट से बना हुआ है, जिसकी दीवारों और गुंबदों पर भगवा रंग किया गया है। लंबे समय से यही स्वरूप दादा दरबार की पहचान बना हुआ है।
अब नए निर्माण के बाद मंदिर सफेद मार्बल की चमक के साथ नजर आएगा। मंदिर को ऐसा स्वरूप दिया जा रहा है, जिससे यह अधिक आकर्षक, दिव्य और भव्य दिखाई दे। निर्माण में उच्च गुणवत्ता वाले मार्बल का उपयोग किया जाएगा।
मंदिर निर्माण समिति ने राजस्थान की कई मार्बल खदानों का निरीक्षण किया है। वहां पत्थरों की गुणवत्ता देखने के साथ ही कीमतों की जानकारी भी ली गई है। फिलहाल कुछ मार्बल के नमूने मंदिर पहुंच चुके हैं। अंतिम निर्णय के बाद सप्लायर तय किया जाएगा।
1. सफेद मार्बल से आकार लेगा नया मंदिर दादाजी धूनीवाले मंदिर के नए मॉडल में सफेद मार्बल से निर्माण कार्य हो रहा है। वर्तमान में मंदिर की सीमेंट-कांक्रीट की दीवारों और गुंबद पर भगवा रंग चढ़ा हुआ है, जो सालों से भक्तों की आंखों के सामने दादा दरबार की पहचान बना है। नए निर्माण में उच्च क्वालिटी का सफेद मार्बल लगाया जाएगा, जिससे मंदिर और अधिक आकर्षक, दिव्य और भव्य स्वरूप में नजर आएगा।
2. सामने नहीं, बाजू में होगा नर्मदा मैया का मंदिर अभी दादाजी दरबार में तीन मंदिर हैं। बड़े दादाजी की समाधि, छोटे दादाजी की समाधि और बड़े दादाजी के ठीक सामने मां नर्मदा मैया का मंदिर। नए मॉडल में तीनों मंदिर समानांतर बनेंगे। इसमें मां नर्मदा का मंदिर बड़े दादाजी के बगल में नजर आएगा। ऐसे में बड़े दादाजी की समाधि मध्य में रहेगी। उनके एक तरफ नर्मदा मैया और दूसरी तरफ छोटे दादाजी का मंदिर होगा।
मंदिर में तीन शिखर बनेंगे, जिनमें सबसे ऊंचा शिखर धूनीवाले दादाजी का होगा। खास बात यह है कि तय नियमों के अनुसार, निर्माण के दौरान दोनों समाधि स्थलों से किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जाएगी।
3. दो की जगह नए मंदिर में तीन प्रवेश द्वार होंगे दादाजी दरबार में अभी दो प्रवेश द्वार हैं। पहला द्वार ट्रस्ट कार्यालय की तरफ से होकर छोटे दादाजी की समाधि तक जाता है। दूसरा मुख्य द्वार है, जिससे प्रवेश करने पर सीधे बड़े दादाजी की समाधि और धूनी माई तक पहुंचा जा सकता है।
परंपरा के अनुसार पहले बड़े दादाजी केशवानंद महाराज के दर्शन होते हैं, फिर उनके शिष्य छोटे दादाजी हरिहर भोलेनाथ के दर्शन कर परिक्रमा पूरी की जाती है। पहले द्वार को निकासी द्वार भी माना जाता है। नए मॉडल में मंदिर के फ्रंट पर अब तीन प्रवेश द्वार बनाए जाएंगे, जिससे श्रद्धालुओं की आवाजाही और भी सुगम होगी।
4. कुल 108 खंभे होंगे, लेकिन दिखेंगे सिर्फ 84 नए मंदिर का निर्माण कुल 108 खंभों पर किया जाएगा, जो सफेद मार्बल के होंगे। इन 108 में से 24 खंभों पर तीनों मंदिरों की दीवारें बनेंगी, जिसके कारण खुले खंभे यानी ओपन पिलर्स की संख्या 84 रह जाएगी। यानी मंदिर 108 खंभों पर खड़ा होगा, लेकिन श्रद्धालुओं को केवल 84 खंभे ही नजर आएंगे।
दरअसल, मंदिर ट्रस्ट ने 108 खंभों का प्रस्ताव रखा था जबकि कुछ लोगों का मानना था कि छोटे दादाजी की इच्छा 84 खंभों वाला मंदिर बनाने की थी। इस पर आर्किटेक्ट ने डिजाइन में ऐसा समाधान निकाला, जिससे दोनों आंकड़े 108 और 84 नए मॉडल में शामिल हो गए।
किस पत्थर से बनेगा मंदिर?
मंदिर मकराना के सफेद मार्बल (Marble) से बनेगा। यह वही मार्बल है जिससे ताजमहल भी बना है। पहले लाल पत्थर से बनने पर जोर दिया जा रहा था लेकिन यह प्रस्ताव खारिज कर दिया गया। दादाजी मंदिर ट्रस्ट ने मकराना 1.5 नंबर क्वालिटी के मार्बल का चयन किया है, ताकि मंदिर मजबूत और भव्य दिखे।
चार चरणों में पूरा होगा मंदिर निर्माण
नए मंदिर का निर्माण चार चरणों में किया जाएगा। मंदिर को पूरा होने में करीब चार साल का समय लगने का अनुमान है। हालांकि मार्बल की उपलब्धता और निर्माण प्रक्रिया को देखते हुए अंतिम लक्ष्य वर्ष 2030 रखा गया है।मंदिर निर्माण में करीब 1.30 लाख घनफुट मार्बल का उपयोग किया जाएगा। इतनी बड़ी मात्रा में मार्बल की व्यवस्था करने में भी समय लगेगा। निर्माण कार्य मंदिर ट्रस्ट की बजाय एक विशेष समिति की निगरानी में कराया जाएगा। इस समिति में सभी पक्षों को शामिल किया गया है, ताकि निर्माण कार्य सहमति और व्यवस्थित तरीके से पूरा हो सके।
23 एकड़ परिसर का भी बदलेगा स्वरूप
श्री धूनीवाले दादाजी आश्रम करीब 23 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। यहां मंदिर के अलावा भक्त निवास, गोशाला, बगीचा, मंदिर ट्रस्ट कार्यालय, श्रद्धालुओं के रुकने के लिए हॉल और प्रसादालय मौजूद हैं। नए मंदिर के साथ-साथ ट्रस्ट ने पूरे परिसर के विकास की योजना भी तैयार की है। गोशाला, भक्त निवास और अन्य सुविधाओं को आधुनिक स्वरूप दिया जाएगा। ट्रस्ट का दावा है कि सिंहस्थ के आसपास आश्रम परिसर में कई नए विकास कार्य पूरे कर लिए जाएंगे।
छह साल पुराने विवाद के बाद शुरू हुआ निर्माण
नए मंदिर निर्माण की मांग कई वर्षों से चली आ रही थी। वर्ष 1990 में छोटे सरकार के समर्थकों ने 84 खंभों वाले मंदिर निर्माण के लिए मार्बल मंगवाया था, लेकिन उस समय ट्रस्ट ने उसे स्वीकार नहीं किया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने रहे। वर्ष 2019 में मंदिर ट्रस्ट ने नए मंदिर की नींव रखकर बंशी पहाड़पुर के गुलाबी पत्थरों से निर्माण शुरू किया। इसी दौरान विवाद सामने आया और 7 जून 2019 को एसडीएम ने निर्माण कार्य पर रोक लगा दी। इसके बाद करीब छह साल तक मंदिर निर्माण का मामला अटका रहा।
कलेक्टर की पहल से सुलझा विवाद
पूर्व कलेक्टर अनूप कुमार सिंह ने भी विवाद सुलझाने के लिए कई बैठकें की थीं, लेकिन सहमति नहीं बन पाई। वर्तमान कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने पदभार संभालने के बाद सभी पक्षों को साथ लेकर बैठकें शुरू कीं। मंदिर ट्रस्ट, छोटे सरकार समर्थक और जनप्रतिनिधियों के बीच करीब छह महीने तक बातचीत चली। इसके बाद विवाद का समाधान निकला। छोटे सरकार समर्थकों ने माना कि उनके द्वारा दिया गया मार्बल थर्ड क्वालिटी का है। इसके बाद सभी पक्षों की सहमति से मंदिर निर्माण के लिए अलग समिति बनाई गई।
राजस्थान से चुना जा रहा मंदिर का मार्बल
मंदिर निर्माण समिति के पदेन सदस्य और कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने बताया कि नए मंदिर को वर्ष 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। समिति के सदस्य राजस्थान जाकर मार्बल खदानों का निरीक्षण कर चुके हैं। वहां पत्थरों की गुणवत्ता और कीमतों की जानकारी ली गई है। फिलहाल मार्बल के कुछ नमूने मंगाए गए हैं। जांच और चर्चा के बाद अंतिम सप्लायर तय किया जाएगा।
1970 के दशक में बना था वर्तमान मंदिर
मौजूदा श्री धूनीवाले दादाजी मंदिर का निर्माण 1970 के दशक में हुआ था। यह मंदिर आरसीसी तकनीक से बनाया गया है।
इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि बड़े दादाजी और छोटे दादाजी की समाधियों पर बने गुंबदों के बीच कोई पिलर नहीं है। इससे श्रद्धालुओं को एक साथ दोनों समाधियों के दर्शन हो जाते हैं।
करीब 55 साल पुराने इस आरसीसी मंदिर में अब कई जगहों पर जर्जरता दिखाई देने लगी है। हालांकि मंदिर ट्रस्ट समय-समय पर इसकी मरम्मत और देखरेख कराता रहा है।
ओटले और टीनशेड से शुरू हुआ था दादा दरबार
बड़े दादाजी श्री केशवानंद महाराज ने खंडवा में जिस पवित्र धूनी के पास रहकर भक्तों को उपदेश दिए थे, वह स्थान शुरुआती समय में ओटले के रूप में जाना जाता था।
वर्ष 1930 में समाधि लेने के बाद उसी स्थान को समाधि स्थल के रूप में विकसित किया गया। बाद में वहां दीवारें बनाई गईं और टीनशेड लगाया गया।
समय के साथ यह छोटा सा स्थान देश-विदेश के श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र बन गया। आज यहां सालभर भक्तों की भीड़ रहती है।





