डिफॉल्टर कंपनियों को राहत का मौका — 90% तक लेट फीस माफी, 90 दिन में पूरा करें अनुपालन

भोपाल में टैक्स लॉ बार एसोसिएशन की स्टडी सर्किल में CCFS-2026 योजना पर विशेषज्ञों ने दी जानकारी

विवेक झा, भोपाल, 17 अप्रैल 2026।
कंपनियों के लिए लंबित वैधानिक फाइलिंग को पूरा करने का सुनहरा अवसर सामने आया है। कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) द्वारा शुरू की गई ‘कंपनी अनुपालन सुविधा योजना, 2026 (CCFS-2026)’ के तहत डिफॉल्टर कंपनियों को भारी राहत दी जा रही है। टैक्स लॉ बार एसोसिएशन, भोपाल द्वारा आयोजित स्टडी सर्किल में इस योजना के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

स्टेट जीएसटी कार्यालय में आयोजित इस सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रदीप मुतरेजा ने बताया कि यह योजना 15 अप्रैल 2026 से 15 जुलाई 2026 तक लागू रहेगी। इसका उद्देश्य कंपनियों को कम वित्तीय बोझ के साथ अपनी लंबित अनुपालन जिम्मेदारियों को पूरा करने का अवसर देना है।

90% तक लेट फीस में छूट

विशेषज्ञों ने बताया कि योजना के तहत कंपनियों को लंबित वार्षिक रिटर्न और वित्तीय विवरण जैसे MGT-7, AOC-4 और ADT-1 दाखिल करने पर लगने वाले अतिरिक्त (लेट) शुल्क में 90% तक की छूट दी जा रही है। यानी कंपनियों को अब केवल सामान्य शुल्क के साथ 10% अतिरिक्त शुल्क ही देना होगा। इससे वर्षों से लंबित फाइलिंग करने वाली कंपनियों को बड़ी राहत मिलेगी।

डॉरमेंट स्टेटस और स्ट्राइक-ऑफ का विकल्प

सत्र में यह भी बताया गया कि जो कंपनियां वर्तमान में निष्क्रिय हैं, वे ई-फॉर्म MSC-1 के माध्यम से ‘डॉरमेंट कंपनी’ का दर्जा प्राप्त कर सकती हैं। इसके लिए उन्हें केवल 50% सामान्य शुल्क देना होगा।
वहीं, जो कंपनियां अपना संचालन पूरी तरह बंद करना चाहती हैं, वे ई-फॉर्म STK-2 के जरिए मात्र 25% शुल्क देकर कंपनी को रजिस्टर से हटवा सकती हैं।

मुकदमे और पेनल्टी से भी राहत

सीए मुतरेजा ने स्पष्ट किया कि यदि कंपनियां इस योजना के तहत समय रहते फाइलिंग कर देती हैं—चाहे नोटिस जारी होने से पहले या नोटिस मिलने के 30 दिनों के भीतर—तो उन्हें जुर्माने और कानूनी कार्रवाई से भी छूट मिल सकती है। यह प्रावधान कंपनियों को मुकदमेबाजी से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

विशेषज्ञों की सलाह: 90 दिन की विंडो का उठाएं लाभ

उन्होंने कंपनियों और पेशेवरों से अपील की कि वे इस 90 दिन की विशेष अवधि का अधिकतम लाभ उठाएं और अपने रिकॉर्ड को पारदर्शी व अद्यतन बनाएं। उन्होंने कहा कि समय रहते अनुपालन करने से भविष्य में भारी पेनल्टी और कानूनी जटिलताओं से बचा जा सकता है।

बड़ी संख्या में शामिल हुए सदस्य

इस स्टडी सर्किल में संस्था के अध्यक्ष अधिवक्ता मनोज पारख, उपाध्यक्ष मयंक अग्रवाल एवं अंकुर अग्रवाल, सचिव धीरज अग्रवाल, सह सचिव संदीप चौहान एवं वरिष्ठ सदस्य राजेंद्र मनवानी, मृदुल आर्य, गोविंद वसंता, सीए राजेश जैन, सीए जितेंद्र जैन आदि शामिल हुए।

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