भोपाल से 5 महीने में 996 टन हवाई माल, इंदौर से 4.6 गुना कम; लॉजिस्टिक्स पार्क पर उठे सवाल
राज्य के निवेश पोर्टल पर भोपाल में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क प्रस्तावित, लेकिन केंद्र की प्राथमिकता वाली परियोजनाओं की सूची में नाम नहीं; क्रेडाई अध्यक्ष मनोज मीक ने उद्योग, रेल, सड़क और हवाई कार्गो को एक साथ विकसित करने की जरूरत बताई

विवेक झा, भोपाल। राजधानी को औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स हब बनाने की संभावनाओं के बीच हवाई माल ढुलाई के आंकड़े एक बड़ा अंतर सामने ला रहे हैं। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) के अप्रैल से अगस्त 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, भोपाल के राजा भोज विमानतल से इस अवधि में 996.6 टन घरेलू हवाई माल की ढुलाई दर्ज हुई, जबकि इंदौर से 4,553.8 टन माल भेजा गया। यानी पांच महीनों में इंदौर का घरेलू एयर कार्गो वॉल्यूम भोपाल के मुकाबले करीब 4.6 गुना रहा।
इन आंकड़ों के आधार पर राजधानी में माल ढुलाई की सुविधाओं, औद्योगिक उत्पादन और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों को परिवहन नेटवर्क से जोड़ने की रणनीति पर नए सिरे से विचार करने की जरूरत सामने आई है। क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज सिंह मीक ने कहा है कि भोपाल को केवल लॉजिस्टिक्स पार्क की योजना तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसके साथ कारखानों, सहायक उद्योगों और नियमित माल ढुलाई की मांग को भी बढ़ाना होगा।
हालांकि, हवाई माल ढुलाई किसी शहर के कुल औद्योगिक कारोबार का पूरा पैमाना नहीं है। भारी और थोक माल का बड़ा हिस्सा रेल तथा सड़क से भेजा जाता है। इसलिए भोपाल और इंदौर की वास्तविक औद्योगिक क्षमता की तुलना के लिए हवाई कार्गो के साथ रेल माल ढुलाई, सड़क परिवहन, औद्योगिक उत्पादन और लॉजिस्टिक्स लागत के आंकड़ों का भी अध्ययन जरूरी होगा।
राज्य के पोर्टल पर भोपाल का नाम, केंद्रीय परियोजना सूची में स्थिति अलग
लॉजिस्टिक्स पार्क को लेकर सरकारी दस्तावेजों में भी अंतर दिखाई देता है। मध्यप्रदेश सरकार के निवेश पोर्टल पर भोपाल और इंदौर में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क को आगामी परियोजनाओं में शामिल किया गया है।
दूसरी ओर, केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की 2 अप्रैल 2025 की संसदीय जानकारी के अनुसार, देश में 35 स्थानों पर मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क विकसित करने की योजना है। इनमें से पांच स्थानों—जोगीघोपा, चेन्नई, बेंगलुरु, नागपुर और इंदौर—की परियोजनाएं विकास के चरण में बताई गई थीं। इस सूची में भोपाल का नाम शामिल नहीं था।
इन दोनों सूचियों का संदर्भ अलग है। राज्य के पोर्टल पर किसी परियोजना का प्रस्तावित होना अपने आप में केंद्र की प्राथमिकता वाली योजना में उसकी स्वीकृति या क्रियान्वयन की पुष्टि नहीं करता। इसलिए भोपाल के प्रस्तावित पार्क की जमीन, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट, वित्तीय व्यवस्था, मंजूरी और निर्माण की समयसीमा की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।
क्रेडाई का सवाल है कि यदि भोपाल में लॉजिस्टिक्स पार्क प्रस्तावित है, तो उसके विकास की वर्तमान स्थिति और आगे की कार्ययोजना सार्वजनिक रूप से स्पष्ट की जानी चाहिए, ताकि उद्योगों और निवेशकों को परियोजना की वास्तविक स्थिति का पता चल सके।
भोपाल के पास हैं परिवहन के कई विकल्प
राजधानी की भौगोलिक स्थिति उसे रेल, सड़क और हवाई परिवहन के संयोजन के लिहाज से अवसर देती है। राजा भोज विमानतल पर घरेलू कार्गो टर्मिनल शुरू होने के बाद हवाई माल ढुलाई के लिए बुनियादी सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा मंडीदीप औद्योगिक क्षेत्र और पश्चिम मध्य रेलवे के माल ढुलाई नेटवर्क को भी व्यापक लॉजिस्टिक्स व्यवस्था के हिस्से के रूप में देखा जा सकता है।
भोपाल के आसपास मंडीदीप, औबेदुल्लागंज, तामोट, बुदनी और मोहासा-बाबई जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ने के साथ कच्चे माल की आवक और तैयार उत्पादों की ढुलाई की जरूरत भी बढ़ सकती है। यदि इन क्षेत्रों को रेल टर्मिनल, वेयरहाउस, कंटेनर सुविधाओं और प्रमुख सड़क मार्गों से बेहतर तरीके से जोड़ा जाए, तो उद्योगों की परिवहन लागत घटाने में मदद मिल सकती है।
इस दिशा में केवल नया बड़ा टर्मिनल बनाना पर्याप्त नहीं होगा। यह भी देखना होगा कि किन उद्योगों को किस प्रकार की माल ढुलाई चाहिए, माल कहां से आता है और कहां भेजा जाता है, कितनी नियमित मात्रा उपलब्ध है तथा मौजूदा सुविधाओं में कहां बाधाएं हैं।
इंदौर में 1,110 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजना
इंदौर के पास पीथमपुर में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क की परियोजना भोपाल के लिए तुलना का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। सरकारी और परियोजना संबंधी दस्तावेजों के अनुसार, इस पार्क का प्रस्तावित क्षेत्रफल करीब 255 एकड़ है और अनुमानित लागत लगभग 1,110 करोड़ रुपये से अधिक है। परियोजना में सड़क और रेल संपर्क के साथ वेयरहाउस, कंटेनर डिपो तथा अन्य व्यावसायिक सुविधाएं विकसित करने की योजना है।
मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क का उद्देश्य माल को एक परिवहन माध्यम से दूसरे माध्यम में आसानी से स्थानांतरित करना, भंडारण की सुविधा उपलब्ध कराना और उद्योगों की आपूर्ति शृंखला को अधिक प्रभावी बनाना है। इससे परिवहन के समय और लागत को कम करने की संभावना रहती है।
भोपाल के संदर्भ में इस मॉडल से सीख लेते हुए यह तय करना जरूरी होगा कि प्रस्तावित पार्क किस औद्योगिक क्षेत्र की जरूरत पूरी करेगा, उसे रेल और सड़क से कैसे जोड़ा जाएगा तथा उसकी लागत और संचालन के लिए कौन-सा वित्तीय मॉडल अपनाया जाएगा।
पहले उद्योगों की जरूरत का आकलन, फिर बड़े निवेश का फैसला
मनोज मीक के अनुसार, भोपाल के विकास की रणनीति में यह सवाल नहीं होना चाहिए कि पहले कारखाने आएंगे या पहले कार्गो हब बनेगा। दोनों को साथ लेकर योजना बनानी होगी। उद्योगों को उत्पादन के लिए कच्चा माल और तैयार माल की किफायती ढुलाई चाहिए, जबकि लॉजिस्टिक्स पार्क को व्यावसायिक रूप से चलाने के लिए नियमित माल प्रवाह और पर्याप्त ग्राहक जरूरी हैं।
इसके लिए औद्योगिक विकास निगम और संबंधित विभागों को उपलब्ध औद्योगिक भूमि, बिजली, कुशल श्रमिकों, संभावित निवेश तथा उत्पादन क्षमता का आकलन करना चाहिए। वहीं, एयरपोर्ट अथॉरिटी, रेलवे और उद्योग संगठनों को मिलकर माल के स्रोत और गंतव्य, परिवहन लागत, ढुलाई के समय और मौजूदा सुविधाओं की कमियों का अध्ययन करना चाहिए।
हवाई परिवहन उन वस्तुओं के लिए उपयोगी हो सकता है, जिनमें समय महत्वपूर्ण है या जिनका मूल्य वजन की तुलना में अधिक है। इसके विपरीत, भारी और बड़े आकार के माल के लिए रेल और सड़क आधारित भंडारण तथा वितरण नेटवर्क ज्यादा व्यावहारिक हो सकता है। इसलिए भोपाल में लॉजिस्टिक्स विकास की योजना स्थानीय उद्योगों की वास्तविक जरूरतों के अनुसार तैयार करनी होगी।
कनेक्टिविटी और संचालन पर भी देना होगा ध्यान
लॉजिस्टिक्स पार्क के सफल संचालन के लिए जमीन उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है। औद्योगिक क्षेत्रों से पार्क तक पहुंचने वाली सड़कों, रेलवे संपर्क, ट्रकों की पार्किंग, वेयरहाउस, कंटेनर हैंडलिंग, बिजली, पानी और डिजिटल ट्रैकिंग जैसी सुविधाओं की भी जरूरत होगी।
परियोजना पर बड़ा निवेश करने से पहले संभावित माल की मात्रा, निजी क्षेत्र की भागीदारी, पर्यावरणीय मंजूरियों और संचालन लागत का आकलन करना भी जरूरी है। इससे ऐसी परियोजना तैयार की जा सकेगी, जो केवल कागजों पर प्रस्तावित न रहे, बल्कि उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप काम करे।
क्रेडाई का सुझाव है कि भोपाल और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों को एक साझा विकास योजना में शामिल किया जाए। इसमें हवाई कार्गो, रेल माल ढुलाई, सड़क नेटवर्क, वेयरहाउसिंग और औद्योगिक उत्पादन को एक-दूसरे से जोड़कर देखा जाए।
राजधानी के लिए अवसर, लेकिन स्पष्ट कार्ययोजना जरूरी
भोपाल में लॉजिस्टिक्स पार्क की संभावना और इंदौर के साथ हवाई माल ढुलाई का अंतर राजधानी के लिए अपनी औद्योगिक रणनीति की समीक्षा करने का अवसर है। राज्य के निवेश पोर्टल पर परियोजना का उल्लेख निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत है, लेकिन जमीन, स्वीकृति, लागत और समयसीमा की स्पष्ट जानकारी के बिना उसके वास्तविक प्रभाव का आकलन करना कठिन है।
अब जरूरत ऐसी कार्ययोजना की है, जिसमें औद्योगिक उत्पादन बढ़ाने, माल ढुलाई की लागत कम करने और परिवहन के विभिन्न साधनों को जोड़ने के लक्ष्य तय हों। यदि उद्योगों की जरूरत और लॉजिस्टिक्स निवेश के बीच बेहतर तालमेल बनाया जाता है, तो भोपाल और उसके आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों को नए निवेश, रोजगार और कारोबार के अवसर मिल सकते हैं।





