मध्यप्रदेश में 7,346 करोड़ के निवेश प्रस्ताव, उद्योग-व्यापार को गति देने के लिए भोपाल डिक्लेरेशन तैयार
एफएमपीसीसीआई के राष्ट्रीय सम्मेलन का समापन, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बोले—विकसित भारत के निर्माण में उद्योग और व्यापार की भूमिका महत्वपूर्ण; मध्यप्रदेश और रूस के बीच क्रिकेट सहयोग समझौते का आदान-प्रदान

भोपाल। मध्यप्रदेश में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने, व्यापारिक गतिविधियों का विस्तार करने और उद्यमियों की समस्याओं के समाधान के लिए नीतिगत पहल करने पर जोर देते हुए फेडरेशन ऑफ मध्यप्रदेश चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एफएमपीसीसीआई) के दो दिवसीय ‘विकसित भारत उद्योग-व्यापार सम्मेलन 2026’ का शुक्रवार को समापन हुआ। फेडरेशन के स्वर्ण जयंती वर्ष के अंतर्गत आयोजित इस राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रदेश के लिए 7,346 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए। सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के उद्योग एवं व्यापार संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ रूस और जर्मनी के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।
सम्मेलन के दौरान उद्योग एवं व्यापार जगत से जुड़े नीतिगत मुद्दों, एमएसएमई की वित्तीय जरूरतों, निर्यात संवर्धन, विनिर्माण, खाद्य प्रसंस्करण, तकनीकी उन्नयन, औद्योगिक अधोसंरचना और कारोबार को आसान बनाने जैसे विषयों पर चर्चा हुई। विभिन्न राज्यों के चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स और औद्योगिक संगठनों से प्राप्त सुझावों को संकलित कर ‘भोपाल डिक्लेरेशन’ के रूप में सरकार के समक्ष प्रस्तुत करने की पहल की गई। इसका उद्देश्य उद्योग एवं व्यापार क्षेत्र की व्यावहारिक समस्याओं को सामने लाकर उनके समाधान के लिए प्रभावी नीतिगत कदम उठाने का आग्रह करना है।
सम्मेलन का शुभारंभ 22 अक्टूबर को कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया था। दो दिवसीय आयोजन का समापन एनराइज बाय सयाजी, भोपाल में हुआ। सम्मेलन की थीम ‘उद्योगों को जोड़ना, अवसर सृजित करना, विकसित भारत का निर्माण करना’ रखी गई थी।
निवेश और औद्योगिक विकास की व्यापक संभावनाएं : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सम्मेलन के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में निवेश और औद्योगिक विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। फेडरेशन ने पिछले 50 वर्षों में उद्योग एवं व्यापार जगत को एक मंच पर लाने, उद्यमियों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने और प्रदेश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों के उद्योग एवं व्यापार संगठनों, अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों और उद्यमियों को एक मंच पर लाने से संवाद एवं सहयोग की नई संभावनाएं बनी हैं। ऐसे आयोजन उद्योग और व्यापार जगत की भूमिका को मजबूत करते हैं और विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक हो सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने फेडरेशन के स्वर्ण जयंती वर्ष में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन को उद्योग जगत के लिए उपयोगी पहल बताया। सम्मेलन में प्रस्तुत निवेश प्रस्तावों को प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, इन प्रस्तावों के वास्तविक निवेश में बदलने के लिए परियोजनाओं की प्रगति, निवेशकों की तैयारी और क्रियान्वयन की स्थिति पर आगे नजर रहेगी।

एमएसएमई और क्षेत्रीय विकास योजनाओं से खुलेंगे नए अवसर
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य काश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में निवेश के अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है। सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े सैकड़ों उद्यमियों की भागीदारी उद्योग एवं व्यापार जगत के बीच बढ़ते समन्वय को दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में रीजनल डेवलपमेंट प्लान और मेट्रोपॉलिटन एरिया जैसी पहल से विकास की नई संभावनाएं बन रही हैं। इन योजनाओं के माध्यम से क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को गति देने और उद्योग-व्यापार के लिए बेहतर अवसर तैयार करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
मध्यप्रदेश जैसे राज्य में एमएसएमई की भूमिका विशेष महत्व रखती है। छोटे और मध्यम उद्योग स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने, सहायक उद्योगों को विकसित करने और बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों की आपूर्ति शृंखला को मजबूत बनाने में योगदान देते हैं। सम्मेलन में इन इकाइयों की वित्तीय आवश्यकताओं, तकनीकी उन्नयन और कारोबार से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर चर्चा हुई।
10 राज्यों के संगठनों और विदेशी प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा
फेडरेशन अध्यक्ष हिमांशु खरे ने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य देश के प्रमुख राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स और व्यापारिक संगठनों को एक मंच पर लाकर उद्योग एवं व्यापार से जुड़े नीतिगत विषयों पर विचार-विमर्श करना था। सम्मेलन में देश के 10 राज्यों के औद्योगिक एवं वाणिज्यिक संगठनों के अध्यक्षों, पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों के साथ रूस तथा जर्मनी के प्रतिनिधियों की सहभागिता रही।
उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास, वैश्विक व्यापार, निवेश संवर्धन, विनिर्माण, निर्यात प्रोत्साहन, नवाचार, एमएसएमई सशक्तीकरण, कारोबार को सुगम बनाने और आत्मनिर्भर भारत जैसे विषयों पर चर्चा की गई। विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों के अनुभवों और सुझावों से मध्यप्रदेश के उद्योग एवं व्यापार क्षेत्र के लिए उपयोगी मुद्दे सामने आए।
खरे ने कहा कि फेडरेशन की 50 वर्षों की सेवा-यात्रा का उद्देश्य उद्योग एवं व्यापार जगत की समस्याओं को प्रभावी ढंग से सरकार तक पहुंचाना और उनके समाधान के लिए सार्थक पहल करना रहा है। सम्मेलन के माध्यम से उद्यमियों, विशेषज्ञों और प्रबुद्धजनों को विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने में उद्योग एवं व्यापार की भूमिका पर विचार रखने का अवसर मिला।
भोपाल डिक्लेरेशन में उठेंगे उद्योगों के व्यावहारिक मुद्दे
सम्मेलन की प्रमुख पहल के रूप में विभिन्न राज्यों के चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स और औद्योगिक संगठनों से प्राप्त सुझावों को संकलित कर ‘भोपाल डिक्लेरेशन’ तैयार किया गया। इसे सरकार के समक्ष प्रस्तुत करने का उद्देश्य नीतिगत स्तर पर उद्योग एवं व्यापार से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं को सामने लाना है।
फेडरेशन के अनुसार, सम्मेलन में एमएसएमई इकाइयों के लिए वित्तीय सहायता, कार्यशील पूंजी की उपलब्धता, निर्यात को बढ़ावा देने, तकनीकी उन्नयन, औद्योगिक अधोसंरचना और व्यापारिक प्रक्रियाओं के सरलीकरण जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।
उद्योग संगठनों की अपेक्षा है कि विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त सुझावों पर सरकार के स्तर पर विचार किया जाए और जरूरत के अनुसार नीतिगत बदलाव किए जाएं। इससे कारोबार करने की प्रक्रिया आसान बनाने, निवेश को प्रोत्साहित करने और औद्योगिक इकाइयों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
7,346 करोड़ के निवेश प्रस्तावों पर रहेगी नजर
फेडरेशन अध्यक्ष हिमांशु खरे ने बताया कि सम्मेलन में फेडरेशन की ओर से 7,346 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किए गए। यह प्रस्ताव प्रदेश में निवेश संवर्धन के प्रयासों को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए उद्योग, व्यापार, कृषि आधारित उद्यम, सेवा क्षेत्र और नवाचार को एकीकृत दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाना आवश्यक है। उद्यमी प्रदेश के आर्थिक एवं औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और फेडरेशन सरकार के साथ समन्वय बनाकर विकास की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी कर रहा है।
हालांकि, निवेश प्रस्तावों और वास्तविक निवेश के बीच अंतर को समझना भी जरूरी है। प्रस्तावों का धरातल पर उतरना परियोजनाओं की मंजूरी, वित्तीय व्यवस्था, भूमि और अधोसंरचना की उपलब्धता तथा क्रियान्वयन जैसे कारकों पर निर्भर करेगा। ऐसे में आगे इन प्रस्तावों की प्रगति प्रदेश के औद्योगिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण संकेतक होगी।
खाद्य प्रसंस्करण से लेकर एमएसएमई ऋण तक हुई चर्चा
सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में उद्योग एवं व्यापार से जुड़े व्यावहारिक विषयों पर जानकारी साझा की गई। राजीव बाहेती ने मूल्य संवर्धन और खाद्य प्रसंस्करण से संबंधित मुद्दों पर विचार रखे। सिडबी के प्रवीण सिंह राणा ने एमएसएमई इकाइयों के लिए ऋण विस्तार और कार्यशील पूंजी की जरूरतों पर जानकारी दी।
भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) के पंकज कुमार झा ने स्थानीय उद्योगों के लिए सहयोग और आपूर्ति के अवसरों पर चर्चा की। उन्होंने लागत नियंत्रण, समय पर आपूर्ति, आरक्षित वस्तुओं, ऑनलाइन विक्रेता पंजीयन, आपूर्तिकर्ता बैठकों और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन जैसे विषयों से संबंधित जानकारी साझा की।
इन चर्चाओं में स्थानीय उद्योगों के लिए बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों की आपूर्ति शृंखला से जुड़ने के अवसरों और उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर बनाने की जरूरत पर जोर रहा। स्थानीय इकाइयों को बड़े संस्थानों की खरीद प्रक्रियाओं और गुणवत्ता मानकों की जानकारी मिलने से उनके कारोबार के विस्तार की संभावनाएं बन सकती हैं।
मध्यप्रदेश और रूस के बीच क्रिकेट सहयोग समझौता
सम्मेलन के समापन समारोह का एक प्रमुख आकर्षण मध्यप्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (एमपीसीए) और रूस के स्मोलेंस्क क्रिकेट एसोसिएशन के बीच क्रिकेट सहयोग संबंधी समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान रहा। एमपीसीए की ओर से सचिव सुधीर असनानी तथा स्मोलेंस्क क्रिकेट एसोसिएशन की ओर से उपाध्यक्ष प्रभांशु श्रोती ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।
फेडरेशन के सचिव प्रवीण आचार्य ने इसे पिछले दो वर्षों के दौरान हुए आपसी दौरों और विश्वास निर्माण का परिणाम बताया। इस समझौते से दोनों पक्षों के बीच क्रिकेट से संबंधित सहयोग को आगे बढ़ाने का रास्ता खुलने की उम्मीद है।
राष्ट्रीय उद्योग-व्यापार सम्मेलन में क्रिकेट सहयोग समझौते का शामिल होना आयोजन के व्यापक स्वरूप को भी दर्शाता है। हालांकि, समझौते के तहत प्रस्तावित गतिविधियों, उनके कार्यक्रम और क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी प्रेस विज्ञप्ति में नहीं दी गई है।
दूसरे दिन मंत्री और उद्योग जगत के प्रतिनिधि हुए शामिल
सम्मेलन के दूसरे दिन नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी, कौशल विकास मंत्री गौतम टेटवाल और लघु उद्योग निगम के अध्यक्ष सत्येन्द्र भूषण सिंह विशेष रूप से उपस्थित हुए। अतिथियों ने फेडरेशन के स्वर्ण जयंती वर्ष में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन की सराहना की।
उन्होंने उद्योग, व्यापार, कौशल विकास और रोजगार सृजन के साथ मध्यप्रदेश के आर्थिक एवं औद्योगिक विकास को गति देने में ऐसे आयोजनों की भूमिका पर विचार रखे।
कार्यक्रम में फेडरेशन के संयुक्त अध्यक्ष वीरेन्द्र कुमार पोरवाल और अखिलेश राठी, उपाध्यक्ष योगेश गोयल, जयदेव ताम्रकार, आनंद बांगुर और राजीव बाहेती सहित कई पदाधिकारी एवं उद्योग प्रतिनिधि शामिल हुए। पूर्व अध्यक्ष दीपक शर्मा, डॉ. आर.एस. गोस्वामी, विजय गौर, योगेश ताम्रकार, मनविंदर ओबेरॉय, पंकज आहूजा और गोविंद गोयल सहित अन्य सदस्यों की भी सहभागिता रही।
इसके अलावा विभिन्न औद्योगिक एवं व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों, उत्तर प्रदेश के संगठन अध्यक्ष डी.पी. सिंह, सेंट्रल टेक्सटाइल एसोसिएशन के अध्यक्ष रणबीर बीज, इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के उपाध्यक्ष राजीव गोयल, स्कोप यूनिवर्सिटी के चांसलर सिद्धार्थ चतुर्वेदी और स्टेट बैंक के एजीएम शैलेंद्र चतुर्वेदी सहित अनेक प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
फेडरेशन ने आयोजन में सहयोग के लिए मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (एमपीआईडीसी) और एमएसएमई विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया।
निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारना होगी अगली चुनौती
फेडरेशन के स्वर्ण जयंती वर्ष में आयोजित इस सम्मेलन ने उद्योग एवं व्यापार जगत के विभिन्न प्रतिनिधियों को साझा मंच उपलब्ध कराया। सम्मेलन में प्रस्तुत 7,346 करोड़ के निवेश प्रस्ताव, ‘भोपाल डिक्लेरेशन’ और मध्यप्रदेश-रूस क्रिकेट सहयोग समझौता प्रमुख उपलब्धियों के रूप में सामने आए।
अब इन पहलों का प्रभाव उनके क्रियान्वयन से तय होगा। निवेश प्रस्तावों को वास्तविक परियोजनाओं में बदलना, एमएसएमई की वित्तीय जरूरतों के समाधान के लिए ठोस कदम उठाना, स्थानीय उद्योगों को बड़े संस्थानों की आपूर्ति शृंखला से जोड़ना और व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना प्रमुख प्राथमिकताएं रहेंगी। यदि सम्मेलन में सामने आए सुझावों पर प्रभावी कार्रवाई होती है, तो इससे मध्यप्रदेश में उद्योग एवं व्यापार के विस्तार और रोजगार सृजन को गति मिल सकती है।





